Musings Others Poetry Prose Short Stories Thoughts

मनुष्यता जीवन

3
Please log in or register to do it.

प्यास है पानी की

हाथो मे जाम है।

मंदिर बहुत कम है

मदिराल्य तमाम है।

अच्छो पर तो ओट है

गंदे काम सरेआम है।

ना तो दिन मे चैन है

ना ही रात को आराम है।

सब का जीवन खतरे मे है

फिर भी लोग निफराम है।

चारो तरफ एक अलग भीड़ है

चारो तरफ इंसानी कोहराम है।

(सुमित लाकरा)

समय स्थिति
दूसरी वाली।

Reactions

2
1
0
0
0
0
Already reacted for this post.

Reactions

2
1

Who liked ?

Leave a Reply to zoritoler imol

Your email address will not be published. Required fields are marked *